Sunday, December 10, 2017

लालू भाई (प्रदीप कोठारी) नहीं रहे

लालू भाई (प्रदीप कोठारी) नहीं रहे 

मेरे बड़े भाई और सभी के प्रिय लालू भाई का आज सुबह कोलकाता में देहावसान हो गया. यह मेरे लिए बहुत ही दुःख की घडी है, दुःख और भी बढ़ जाता है क्योंकि उनके अंतिम समय में मैं उनके पास नहीं था. आज सुबह जब भतीजे चेतन ने फ़ोन पर समाचार दिया तो एक बार तो विश्वास ही नहीं हुआ. लालू भाई पिछले २ महीने से काफी बीमार चल रहे थे और ७१ वर्ष की आयु में आज उन्होंने अपना अंतिम सांस लिया. आप  अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कंचन एवं एक पुत्री श्रीमती श्री बांठिया को अपने पीछे बिलखता हुआ छोड़ गए. 

लालू भाई के नाम से जान जान में विख्यात श्री प्रदीप कोठारी का जन्म अजीमगंज में हुआ. वे स्वर्गीय श्री समरेन्द्रपत जी कोठारी (बेटा बाबू) के पुत्र एवंम स्वर्गीय श्री चन्द्रपत जी कोठारी के पौत्र थे. आपकी माता जी श्रीमती पुतुल कुमारी अभी जीवित हैं और उन्हें पुत्र वियोग का दुःख सहन करना पड़ रहा है.

लालू भाई अपने पैतृक व्यवसाय जवाहरात का काम करते थे और साथ में धार्मिक- सामाजिक कार्यों में सदा अग्रणी रहते थे. श्री महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता के ट्रस्टी के रूप में आपने अविस्मरणीय सेवाएं प्रदान की है. वे जैन जोहरी संस्थान के भी संस्थापक सदस्यों में से थे एवं श्रीमद राजचन्द्र आश्रम, हम्पी में भी ट्रस्टी के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की. आप नियमित प्रभु पूजा करंट थे एवं स्वाध्याय व ध्यान के प्रति भी उनका लगाव था. उन्होने कई बार विपश्यना ध्यान का शिविर भी किया था. बच्चों को धर्म के प्रति प्रेरित करने के लिए उन्होंने बहुत काम किया. 

यद्यपि वे मेरे ताऊजी के लड़के थे लेकिन मेरे प्रति उनका स्नेह सगे भाई से भी बढ़ कर था. मैं जयपुर और वो कोलकाता रहते थे पर नियमित रूप से उनसे फ़ोन पर बातचीत होती रहती थी. जब हम मिलते थे तो धर्मचर्चा में घंटों का समय कब व्यतीत हो जाता था पता ही नहीं चलता था. आज वो हमारे बीच नहीं हैं और यह खालीपन कैसे भरेगा पता नहीं. 

मैं अरिहंत परमात्मा से उनके सद्गति की कामना करता हूँ. वो जहाँ भी हों सुख एवं शांति से रहें यही प्रार्थना है. 

Jyoti Kothari 
(Jyoti Kothari is proprietor of Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.) 

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Saturday, January 14, 2017

History of Shaharwali Jain community of Murshidabad


History of Shaharwali Jain community of Murshidabad: A request
Jyoti Kothari

It is a well-known fact tat Shaharwali community of Azimganj-Jiaganj-Murshidabad has a very rich tradition of vibrant culture. In fact, this community has enriched the culture of Bengal in one hand and of the Jain society on the other. However, it is regrettable that no systemic research work has done to document the history of Shaharwali society.





It is a well-known fact that Shaharwali community of Azimganj-Jiaganj-Murshidabad has a very rich tradition of vibrant culture. In fact, this community has enriched the culture of Bengal in one hand and of the Jain society on the other. However, it is regrettable that no systemic research work has done to document the history of Shaharwali society.

Murshidabad Heritage Society has taken an initiative to popularize the rich culture through various events. Few books are also published. However, we need a systemic research and that cannot be completed without referring to the Jain temples of Murshidabad, contributions of Sripujjya Ji, Yatis, and Sadhu-Sadhvis.

The culture of Shaharwali society was so embedded with the Jain religion that cannot be separated. The Jain community of Rajasthan (Rajputana, Marwad) was migrated from Rajasthan to find their fortune in Bengal, especially Murshidabad. They have contributed to the economic and social development of Murshidabad in Bengal.

Though the Shaharwali community was working continually with the Muslim Nawabs and the local Bengali society, they never forget their religion and carefully protected the same. The huge Jain temples, Poshals, Amil khata are the symbols of the dedication to the Jain religion.

I am trying to collect and preserve history and culture of the Shaharwali society for many years through writing blogs and propagating those I social media. I, take the opportunity to request, the office-bearers and executive of Murshidabad heritage society along with the Sri Sangh and Murshidabad Sangh to make it a point to conduct systemic research.

I believe, they will take my request seriously.

Jyoti Kothari
(Jyoti Kothari is proprietor of Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.) www.vardhamangems.com

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Sunday, January 1, 2017

अजीमगंज नेमिनाथ स्वामी का प्राचीन स्तवन


अजीमगंज स्थित श्री नेमिनाथ स्वामी का एक अति प्राचीन स्तवन अभी अभी देखने मिला है. दो सौ वर्षों से भी अधिक प्राचीन यह स्तवन उपाध्याय श्री क्षमाकल्याण जी द्वारा रचित है. इस स्तवन के रचना की तिथि अज्ञात है. क्षमाकल्याण जी महान साधक एवं वरिष्ठ विद्वान् थे जिनके स्वर्गवास का दो सौ वर्ष मनाया जा रहा है. खरतर गच्छ परम्परा में उन्होंने क्रियोद्धार कर सुवुहित मार्ग को दृढ किया था. आज भी दीक्षा के समय क्षमाकल्याण जी का वासक्षेप प्रदान किया जाता है.


Kshamakalyan Khartar Gachchh Upadhyay in Bikaner Kripachandra Suri upashray
उपाध्याय क्षमाकल्यन जी, बीकानेर 
उन्होंने अजीमगंज के नेमिनाथ भगवन का स्तवन लिखा है जिसका अर्थ ये है की यह स्तवन दो सौ वर्षों से अधिक पुराना है, इससे यह नया तथ्य भी प्रकाशित होता है की नेमिनाथ स्वामी का मंदिर दो सौ सालों से भी अधिक पुराना है. अभी तक यह माना जाता रहा है की यह मंदिर लगभग सवा सौ साल पहले बना था.

अजीमगंज नेमिनाथ मंदिर मूलगंभारा 
उपाध्याय श्री क्षमाकल्याण जी के स्वर्गवास के द्विशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में खरतर गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी के शिष्य श्री मेहुलप्रभ सागर जी ने "क्षमाकल्याण जी कृति संग्रह" नाम से एक पुस्तक संकलित की है जिसके भाग १, पृष्ठ ९७ में यह स्तवन प्रकाशित हुआ है.  खरतर गच्छ साहित्यकोषः क्रमांक ३५४७ से इसे संकलित किया गया है.

नेमिनाथ स्वामी सुसज्जित रंगमंडप 
अजीमगंज मंडन 
श्री नेमिनाथ जिनेन्द्र स्तवन
(ढाल-नीबडलीनी)

जगपति नेमि जिनंद प्रभु म्हारा, जग. 
वाविसम शासन धनी, गिरुवा गुणनिधि राज। 
समुद्रविजय शिवा नन्द प्रभु म्हारा, जग 
सांवल वरन सुहामणा, गिरुवा गुणनिधि राज. 
यादवकुल शणगार प्रभु म्हारा,
शंख लांछन प्रभु शोभता,  गिरुवा गुणनिधि राज।
सौरिपुर अवतार प्रभु म्हारा, 
अपराजित सुरलोक थी, गिरुवा गुणनिधि राज।
देह धनुष दस मान प्रभु म्हारा,  
रूप अनूप विराजता, गिरुवा गुणनिधि राज।
आऊ थिति परमान  प्रभु म्हारा,  
वरस सहस इक अति भलो, गिरुवा गुणनिधि राज।
प्रभु म्हारा,  गिरुवा गुणनिधि राज।
नवयौवन वर नार प्रभु म्हारा,
उग्रसेन नृप नन्दनी  गिरुवा गुणनिधि राज।
नाव भव नेह निवार प्रभु म्हारा,
राजुल राणी परिहरि, गिरुवा गुणनिधि राज।
पशुआँ तणी पुकार प्रभु म्हारा,
सांभली करुणा रास भर्या, गिरुवा गुणनिधि राज।
रथ फेरी तिण वार प्रभु म्हारा,
फिर आया निज मंदिरे,
गिरणारे संयम ग्रह्यो, गिरुवा गुणनिधि राज।
देइ संवत्सरी दान प्रभु म्हारा,  गिरुवा गुणनिधि राज।
पामी केवलज्ञान प्रभु म्हारा,
संघ चतुर्विध थपियो, गिरुवा गुणनिधि राज।
पंच सयां छत्तीस प्रभु म्हारा,
मुनिवर साथे मुनिपति, गिरुवा गुणनिधि राज।
शिव पुहूता सुजगीश प्रभु म्हारा,
पद्मासन बैठा प्रभु, गिरुवा गुणनिधि राज।
मासखमण तप मान प्रभु म्हारा,
करि अणशण आराधना, गिरुवा गुणनिधि राज।
गढ़ गिरनार प्रधान प्रभु म्हारा,
तीन कल्याणक जिहां थया, गिरुवा गुणनिधि राज।
योगीश्वर शिरताज प्रभु म्हारा,
निरुपाधिक गुण आगरु, गिरुवा गुणनिधि राज।
अविचल आतमराज प्रभु म्हारा,
पाम्यो परमानन्द मैं, गिरुवा गुणनिधि राज।
सकरण वीरज अंत प्रभु म्हारा,
निरुपाधिक गुण आगरु,गिरुवा गुणनिधि राज।
नगर अजीमगंज भाण प्रभु म्हारा,
नेमि जिनेश्वर साहिबा,गिरुवा गुणनिधि राज।
शुद्ध क्षमाकल्याण प्रभु म्हारा,
आतम गुण मुझ दीजिये  गिरुवा गुणनिधि राज।

श्री नेमिनाथ भगवान् का मंदिर १२५ वर्ष प्राचीन माना जाता है, परंतु कुछ ऐतिहासिक तथ्यों से संकेत मिलता है की यह मंदिर उससे कहीं अधिक पुराना है. प्राचीन मंदिर के गंगा के कटान में जाने के बाद यह नया मंदिर बनाया गया था ऐसा मुझे अजीमगंज के श्री विमल नवलखा ने बताया था. क्षमा कल्याण जी द्वारा रचित यह स्तवन मिलने से उनके कथन की पुष्टि होती है और श्री नेमिनाथ जी के मंदिर का दो सौ वर्ष से अधिक प्राचीन होना सिद्ध होता है. परंतु यह मंदिर वास्तव में और कितना पुराना है यह अभी भी शोध का विषय है.

अभी ये पता करना है की श्री नेमिनाथ स्वामी के नए मंदिर में जो मूलनायक विराजमान हैं वो प्राचीन मंदिर के ही हैं या और कहीं से लाइ गई है? उस प्राचीन मंदिर को किसने और कब बनाया था? पुराना मंदिर कब गंगा के कटान में चला गया? इस प्रकार अनेक तथ्य सामने लाने के लिए शोध की आवश्यकता है; इस सम्वन्ध में किसी भी प्रकार की जानकारी हो तो अवश्य संपर्क करने का कष्ट करें.

श्रीमद देवचंद का आध्यात्मिक एवं भक्ति साहित्य

साधुकीर्ति रचित सत्रह भेदी पूजा का अर्थ


Jyoti Kothari
(Jyoti Kothari is proprietor of Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.)
#अजीमगंज #नेमिनाथ #प्राचीन #स्तवन #उपाध्याय #क्षमाकल्याण
#Azimganj #Neminath #JainTemple #Upadhyay #Kshamakalyan #Stavan #Bhajan 

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Monday, September 19, 2016

सिताब चन्द प्रसन्न चन्द बोथरा परिवार के सम्वन्ध में कुछ नए तथ्य


शहरवाली समाज के एक प्रमुख परिवार बोथरा परिवार के श्री विनोद चन्द जी बोथरा कल जयपुर में मेरे घर पधारे थे और उनसे उनके परिवार के सम्वन्ध में कुछ नए तथ्य जाने  को मिले।  श्री विनोद चन्द जी बोथरा शहरवाली समाज के स्वनाम धन्य श्री परिचन्द जी बोथरा के सुपुत्र एवं श्री प्रसन्न चन्द जी बोथरा के पौत्र हैं.

उन्होंने बताया की अजीमगंज में श्री सिताब चन्द जी बोथरा का अपना कोई मकान नहीं था और वे किराये के मकान में रहते थे, उनका परिवार काफी बड़ा था. उनके घर में कुलदेवी आदि की अनेक मूर्तियां थीं परंतु उन्होंने निश्चय किया की उनके घर में केवल अरिहंत परमात्मा की पूजा होगी अन्य किसी की पूजा की कोई आवश्यकता नहीं है; इसलिए उन्होंने बाकि की सभी मूर्तियों को गंगा जी में विसर्जित कर दिया। तबसे उनके घर में कुलदेवी या भैरव जी आदि किसी की पूजा नहीं होती है।

श्री सिताब चन्द जी बोथरा अल्पायु में निधन हो गया तब उनके ज्येष्ठ पुत्र श्री प्रसन्न चन्द जी बोथरा को उनकी माता जी बहादुर सिंह जी सिंघी के यहाँ कोल्कता ले कर आ गई, यह प्रसन्न चन्द जी की मासी का घर था और यहीं उनका लालन पालन हुआ. प्रसन्न चन्द जी बोथरा ने कोलकाता में पात की दलाली का काम शुरू हुआ और धीरे धीरे काम जम गया. उनके तीनो पुत्र श्री परी चन्द जी, श्री चन्द जी व गंभीर चन्द जी भी इसी काम में लग गए. उनके बड़े लड़के पारी चन्द जी ने  १९४५ में जियागंज में पहला मुकाम खरीदा और प्रसन्न चन्द बोथरा ऐन्ड सन के नाम से कारोबार शुरू किया। इस कारोबार में उन्होंने बहुत नाम एवं पैसा कमाया। उनके छोटे भाई श्री गंभीर चन्द जी बोथरा भी उनके साथ इसी काम में लगे थे.

दूसरी तरफ मझले भाई श्रीचंद जी बोथरा ने प्रसिद्द ब्रिटिश कंपनी A. M. Mair को खरीद लिया और जुट की दलाली करते रहे. तीनो भाई पारसी बागान में पिता द्वारा खरीदे मकान में ही संयुक्त परिवार में रहते थे. बाद में परीचन्द जी एवं श्रीचंद जी ने डोवर रोड (देवदार स्ट्रीट) में नया मकान बना लिया और गंभीर चन्द जी पुराने मकान में ही रह गए.


Famous persons and families in Murshidabad part 6: Bothra Family


Jyoti Kothari
(Jyoti Kothari is proprietor of Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.) 

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Saturday, September 17, 2016

Sourav Kothari is selected for Arjuna award


Sourav Kothari and Manoj Kothari Billiards
Manoj Kothari (Father) training Sourav Billiards 

Sourav Kothari is proud of Shaharwali society who won the prestigious Arjuna award this Olympic year 2016. Arjuna award is the highest honor in India for outstanding sports activities and performances.  He proved the proverb "like father like son". Manoj Kothari, his father, won the world title for billiards long back (1990) and Sourav is following the path paved by him. Recently, I met Manoj Kothari in Kolkata, a proud father, who told me about the journey of Sourav. He is a national coach in India and also coaching in four other countries. Obviously, he is coaching his son too. 

Sourav is the current National champion in billiards. He won the Asian gold, the national title, and the World bronze in 2014 the best year for Sourav. Presently, he is number 3 in the world ranking in Billiards and world number 5 in 6-Red Snooker. 

I, on behalf of the Shaharwali society, congratulate both Manoj Kothari, the father and Sourav Kothari, the son on this proud moment both for their family and our community. 

Jyoti Kothari 
(Jyoti Kothari is proprietor of Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.)

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Thursday, July 7, 2016

Pankaj Bothra has created NCLT, a great web portal for Corporate law


Pankaj Bothra of Jiaganj has created New Corporate Law Treatise, NCLT, a great web portal for the Corporate law. Pankaj is a law graduate, practicing in Delhi High Court and a Company Secretary. He has his own law firm "Veda Legal" in New Delhi.

New Corporate Law Treatise, NCLT, has excellent features. It contains almost anything and everything about the corporate law in India; right from the Corporate act 1956 and Corporate act 2013 to rules, draft rules, notifications, circulars, orders, guidelines, standards, and what not.

There is a compare section in the web portal to compare act 1956 with act 2013, that is extremely useful for all corporate law professionals. The news section includes the latest news on the corporate world. In fact, this is a great web portal and I like to congratulate him for his effort.

#NCLT Advocate Pankaj Jain, CS, Veda Legal NCLT
#NCLT Advocate Pankaj Jain, CS at Veda Legal 
Pankaj Bothra alias Pankaj Jain is a grandson of late Sri Bahadur Singh Bothra, a renowned footballer from Jiaganj, and son of Sri Urmila and Jyoti Singh Bothra. He is a Shaharwali and Shaharwali community members are doing well everywhere.

Jyoti Kothari (Jyoti Kothari is proprietor of Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.) 

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Monday, June 27, 2016

रंजन नाहर, अजय बोथरा एवं रविन्द्र श्रीमाल कोलकाता बड़े मंदिर में चुने गए


कल २६ जून रविवार, कोलकाता तुलापट्टी स्थित बड़े मंदिर के चुनाव २०१६ में शहरवाली समाज के लोगों ने सफलता हासिल की है. कुल सात ट्रस्टियों में से शहरवाली समाज से तीन,  रंजन नाहर, अजय बोथरा एवं रविन्द्र श्रीमाल ट्रस्टी के रूप में निर्वाचित हुए हैं। सामान्य परंपरा ये रही है की  शहरवाली साथ से २, जौहरी साथ से २ एवं मारवाड़ी साथ से ३ ट्रस्टी चुने जाते हैं. परन्तु यह केवल परंपरा है कोई नियम नहीं।

शहरवाली साथ के  रंजन नाहर, अजय बोथरा एवं रविन्द्र श्रीमाल के अलावा जौहरी साथ के नरेंद्र पर्सन एवं सुशिल रायसुराणा एवं मारवाड़ी साथ के थानमल बोथरा व कमल सिंह रामपुरिया कोलकाता बड़े मंदिर में ट्रस्टी के रूप में चुने गए.

उल्लेखनीय तथ्य ये है की कई दिग्गज भी इस चुनाव में हार गए जिनमे से अखिल भारतीय खरतर गच्छ महासंघ के संस्थापक सदस्य ज्ञानचंद लुनावत एवं महासंघ के पूर्व अध्यक्ष पदमचंद नाहटा जैसे लोग भी सम्मिलित हैं. ये दोनों ही महानुभाव मारवाड़ी साथ के हैं.

इस चुनाव में जोहरी साथ के केवल दो ही व्यक्ति खड़े हुए थे और दोनों ने ही जीत दर्ज़ की जबकि शहरवाली समाज के चार में से तीन. मारवाड़ी साथ से ७-८ लोग खड़े हुए थे परन्तु केवल २ ही जीत पाए.

सभी ७ निर्वाचित प्रतिनिधियों को बहुत बहुत वधाई देते हुए यह आशा करता हूँ की ये सभी लोग मंदिर की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाते हुए जिन शासन की प्रभावना करते रहेंगे।

Jyoti Kothari
(Proprietor, Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.) 

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Friday, July 31, 2015

मेरी पूज्या माता श्री स्वर्गीया श्रीमती कुसुम कुमारी कोठारी




मेरी पूज्या माता श्री स्वर्गीया श्रीमती कुसुम कुमारी कोठारी , धर्मपत्नी, स्वर्गीय श्री धीरेन्द्र पत जी कोठारी की सप्तम पुण्य तिथि आज जयपुर में मनाई गई। श्रीमती कुसुम कुमारी कोठारी का स्वर्गवास ७ वर्ष आज ही के दिन ३१ जुलाई २००८ को ह्रदय रोग से जयपुर में हुआ था। उस समय आप ७९ वर्ष की थीं।

श्रीमती कुसुम कुमारी का जन्म कोलकाता के स्वनाम धन्य राय बद्रीदास बहादूर मुकीम परिवार में इस्वी सन १९३० में हुआ था। 
कोलकाता  के प्रसिद्ध पारसनाथ मन्दिर के निर्माता एवं वाइस रोय के जौहरी राय बद्रीदास बहादुर के ज्येष्ठ पुत्र श्री राय कुमार सिंह आप के दादा व श्री फ़तेह कुमार सिंह मुकीम आप के पिता थे। आप का ननिहाल रिंगनोद, मालवा के प्रसिद्ध बड़े रावले में था एवं ठा. रणजीत सिंह जी श्रीमाल आप के नाना थे. आप की माँ का नाम श्रीमती सज्जन कुमारी था।

बचपन से ही आप में परिवार के अनुरूप धार्मिक संस्कार थे। उस काल में भी आपने अंग्रेजी एवं संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी। आप वीणा व हारमोनियम बजाया करती थीं।

आप का विवाह अजीमगंज के पानाचंद नानकचंद कोठारी परिवार में श्री कमलापत कोठारी के पौत्र व श्री चंद्रपत कोठारी के कनिष्ठ पुत्र श्री धीरेन्द्र पत कोठारी से सन १९४६ में संपन्न हुआ। आपके प्रमिलाउर्मिलानिर्मलाशीला  सुजाता नाम की पाँच पुत्रियाँ व ज्योति नाम का एक पुत्र हुआ जिनमे निर्मला का देहांत बचपन में ही हो गया था। अभी आपकी चार पुत्रियाँ व एक पुत्र मौजूद हैं। आपकी दौहित्री (नतनी) व शीला लोढा की पुत्री ने साध्वी श्री शशिप्रभा श्री जी के पास (१९९८) अल्पायु में दीक्षा ग्रहण की थी। वे आज साध्वी श्रीश्रद्धान्विता श्री जी के नाम से जानी जाती हैं। साध्वी श्री श्रद्धान्विता श्रीशीला  सुजाता तीनो ने ही इस वर्ष वर्षी तप का परना पलिताना में किया।

 सितम्बर १९७९ को श्री धीरेन्द्र पत कोठारी के अल्पायु में देहावसान के बाद पुरे परिवार की जिम्मेदारी आप पर आ गई जिसे उन्होंने बखूबी निभायी । साथ ही अपना जीवन पुरी तरह से धर्म ध्यान में समर्पित कर दिया। आप प्रतिदिन जिन पूजा के अलावा चार- पाँच सामायिक किया करती थीं। दृढ़ता पूर्वक एक आसन में बैठ कर जप करना आप को बहुत प्रिय था। आपने अपने जीवन में पालिताना, सम्मेत शिखर, आबू, गिरनार, पावापुरी, राजगृह, कुण्डलपुर, चम्पापुर, नाकोडा, नागेश्वर, मांडव गढ़, अजमेर, मालपुरा, महरोली आदि सैंकडों तीर्थों की यात्राएं कर पुण्य उपार्जित किया। अजीमगंज में प्रसिद्ध नवपद ओली की आराधना आप जीवन पर्यंत करती रहीं। इसके अलावा आपने वीस स्थानक, मौन ग्यारस, ज्ञान पंचमी आदि अन्य अनेक तपस्चर्यायें भी की। आपने शत्रुंजय तीर्थ की निन्याणु यात्रा भी की।

आज हमारी माँ हमारे बीच में नहीं हैं परन्तु उनकी यादें व उनके दिए हुए धार्मिक संस्कार आज भी हमारा मार्ग दर्शन करती है। हम उनके सभी बच्चे यही प्रार्थना करते हैं की वे जहाँ हैं वहीँ से हमें आशीर्वाद प्रदान करती रहें।

ज्योति कोठारी, पुत्र,
ममता कोठारी, पुत्रवधू, दर्शनपौत्र, जयपुर
प्रमिला पालावत, पुत्री, कोलकाता
उर्मिला बोथरा, पुत्री, आगरा
शीला लोढा, पुत्री, बंगलुरु 
सुजाता पारख, पुत्री, रायपुर

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Saturday, July 11, 2015

कर्मयोगी श्री अभय चन्द जी बोथरा का स्वर्गवास


श्री अभय चन्द जी बोथरा


कर्मयोगी श्री अभय चन्द जी बोथरा का कल रात कोलकाता में स्वर्गवास हो गया है. हम उनके स्वर्गवास पर हार्दिक शोक संवेदना प्रगट करते हैं. श्री अभय चन्द जी बोथरा पुत्र स्वर्गीय श्री मोहनलाल जी बोथरा  'मारवाड़ी साथ" के थे एवं उनका विवाह अजीमगंज के पानाचंद नानकचन्द कोठारी परिवार के श्री अभय चन्द जी कोठारी की पुत्री प्रभा देवी से हुआ था.

वे सच्चे अर्थों में कर्मयोगी एवं सादा जीवन उच्च विचारों के प्रतीक थे. अपनी मेहनत से उन्होंने अपने ताले के व्यवसाय को बहुत बढ़ाया एवं व्यापर में नैतिकता के उच्चतम मानदंडों का जीवन पर्यन्त पालन किया। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने सभी छोटे भाई-बहनो का पालन पोषण किया एवं उन्हें भी उच्च नैतिक मानदंडो का पालन करने के लिए प्रेरित करते रहे. उन्हें अध्ययन करने का एवं फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था एवं अपनी व्यस्त दिनचर्या में से भी इन कामो के लिए समय निकल लिया करते थे।  वे बहुत ही उच्च दर्ज़े के फोटोग्राफर थे

बुद्धिमत्ता एवं धार्मिक संस्कार उन्हें विरासत में मिली जिसके कारण नित्य पूजा पाठ करने वाले होते हुए भी धर्म का कोई दकियानूसी बंधन उनमे नहीं था।  अपने जीवन के समस्त धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक एवं पारिवारिक कर्त्तव्य निर्वाह में उन्हें अपनी पत्नी प्रभा देवी (छोटकी) का भरपूर साथ मिला। आपके चाचा श्री शुभकरण जी बोथरा स्वनामधन्य जैन विद्वान एवं स्वतंत्रता सेनानी थे एवं मामा श्री पुनम बाबू नाहर ने जैन दीक्षा अंगीकार की थी.

ऐसे कर्मयोगी व्यक्ति का निधन परिवार एवं समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है परन्तु विधि के विधान के आगे किसी का वष नहीं चलता। अरिहंत परमात्मा के भक्त ऐसे व्यक्ति को अवश्य ही सद्गति प्राप्त हुई होगी, वे जहाँ भी हैं वहीँ से हम सब पर आशीर्वाद की वर्षा करते रहें यही कामना करते हैं.

Jyoti Kothari (Proprietor Vardhaman Gems, Jaipur, representing Centuries Old Tradition of Excellence in Gems and Jewelry. He is a Non-resident Azimganjite.)

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Friday, July 10, 2015

Shaharwali blog has completed its seven years on 26th June 2015




Shaharwali blog has completed its seven years on 26th June 2015 and we have celebrated its anniversary. I have started writing about Shaharwali community capitulating my memories and put those in Azimganj-Jiaganj-Murshidabad blog. It was June 27, 2008. 


This blog has scored one hundred sixty-three (163) posts since then covering almost all aspects of Shaharwali community.More than 62,000 (Sixty-two thousand) visitors have visited the blog, read posts from all over the world. Surprisingly, We have 50,000 international visitors, according to Google statistics.


 The blog has been developing as a reference site for Shaharwali community. Thanks to the readers, commenters and those who supplies useful materials. We are also thankful to them who helped spreading the message and propagate the blog.


We seek worldwide representatives for the blog.

Representatives for Shaharwali blog


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Jyoti Kothari
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